Tuesday, March 30, 2010

mere desh ka kanun

२६/११ की घटना को do वर्ष होने को जा रहे है लेकिन हम अब तक उस हमले के एकमात्र जीवित आतंकी को सजा नहीं दे पाए है. अलमल आमिर कसाब भारत में स्पेशल कोर्ट में खड़े होकर ठहाके लगता है. वो जेल में बिरयानी की मांग करता है क्यों कि वो जानता है कि वो एक ऐसे मुल्क में बंदी है जहा मानव से अधिक मानव अधिकार बड़ा माना जाता है , जहा देश हित से बड़ा पार्टी हित और अपनी कुर्सी का हित होता है. हमारी सरकार सैकड़ों लोगो को मारने वाले कसाब पर अपनी जनता के खून पसीने की कमाई बर्बाद कर रही है. इससे शर्म की बात क्या होगी की जिस आतंकवादी को निर्दोष लोगो को मारते हुए सबने लाइव देखा था उसे हम सजा नहीं दे पा रहे है. उसके खिलाफ भी सबूत ढूढे जा रहे है .क्या ये हमारे कानून की कमी नहीं है ? क्या ऐसे आदमी को फांसी देने के लिए सबूतों की जरुरत है ? यदि हा तो फिर ये उन लोगो ओके गाली देने जैस होगा जिन्होंने इस हमले में अपनी जान गवाई है. ये उन शहीदों के साथ विश्वासघात है जिन्होंने देश के नाम अपने प्राण न्योछावर कर दिए. कसाब जैसे आदमी के लिए कोई कानून नहीं होता लेकिन फिर भी हम तुष्टिकरण कि आंधी में कसाब सर आँखों बैठा रहे है . ऐसे व्यक्ति को तो सरे आम जनपथ पर गोली मार देनी चाहिए और जनपथ का भी नाम चरितार्थ करना चाहिए , लेकिन क्या भारत में ऐसा संभव है ?

Friday, March 26, 2010

दर्द लम्हों को हद से गुज़र जाने दे !

दर्द लम्हों को, हद से गुज़र जाने दे,

मेरी यादों को टूट के, बिखर जाने दे .

ये कब तक सोचुं , की तू है प्यार मेरा,
यूं कब तक करूं , मैं इंतज़ार तेरा,
मुझको तकती है, कब से रहगुज़र जाने दे,
मेरी यादों को टूट के, बिखर जाने दे .

वो शोख गुंचा, यादों का गिरता नहीं,
जुस्तजू जीस्त की, पर कुछ मिलता नहीं,
ज़िंदगी को कभी, सफर दर सफर जाने दे,
मेरी यादों को टूट के , बिखर जाने दे .

वो बेवफ़ा नही, मैं बेवफ़ा ही सही,
अब और मुझसे मगर, सहा जाता नहीं,
मुझको कहेंगे लोग, बेशरम जाने दे,
मेरी यादों को टूट के, बिखर जाने दे .

मेरे दिल की उलझनों को, ऐ माज़ी बता,
किस तरह खोया उसको, वो कहानी बता,
उनके हों लाख तंज़ मुझपे, मगर जाने दे,
मेरी यादों को टूट के बिखर जाने दे .

दर्द लम्हों को हद से गुज़र जाने दे !!!

तंज़ = comments!

दर्द लम्हों को, हद से गुज़र जाने दे,
मेरी यादों को टूट के, बिखर जाने दे .

ये कब तक सोचुं , की तू है प्यार मेरा,
यूं कब तक करूं , मैं इंतज़ार तेरा,
मुझको तकती है, कब से रहगुज़र जाने दे,
मेरी यादों को टूट के, बिखर जाने दे .
ज़िंदगी को कभी, सफर दर सफर जाने दे,
मेरी यादों को टूट के , बिखर जाने दे .

वो बेवफ़ा नही, मैं बेवफ़ा ही सही,
अब और मुझसे मगर, सहा जाता नहीं,
मुझको कहेंगे लोग, बेशरम जाने दे,
मेरी यादों को टूट के, बिखर जाने दे .

मेरे दिल की उलझनों को, ऐ माज़ी बता,
किस तरह खोया उसको, वो कहानी बता,
उनके हों लाख तंज़ मुझपे, मगर जाने दे,
मेरी यादों को टूट के बिखर जाने दे .

दर्द लम्हों को हद से गुज़र जाने दे !!!

तंज़ = comments

Saturday, March 20, 2010

अल्फ़ाज़ों मैं वो दम कहाँ जो बया करे शख़्सियत हमारी,
रूबरू होना है तो आगोश मैं आना होगा ,
यूँ देखने भर से नशा नहीं होता जान लो साकी,
हम इक ज़ाम हैं हमें होंठो से लगाना होगा ......

हमारी आह से पानी मे भी अंगारे दहक जाते हैं ;
हमसे मिलकर मुर्दों के भी दिल धड़क जाते हैं ..
गुस्ताख़ी मत करना हमसे दिल लगाने की साकी ;
हमारी नज़रों से टकराकर मय के प्याले चटक जाते हैं.

main

अगर रख सको तो एक निशानी हूँ मैं,
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं,
रोक पाए न जिसको ये सारी दुनिया,
वो एक बूँद आँख का पानी हूँ मैं,
सबको प्यार देने की आदत है हमें,
अपनी अलग पहचान बनाने की आदत है हमे,
कितना भी गहरा जख्म दे कोई,
उतना ही ज्यादा मुस्कराने की आदत है हमें,
इस अजनबी दुनिया में अकेला ख्वाब हूँ मैं,
सवालो से खफा छोटा सा जवाब हूँ मैं,
जो समझ न सके मुझे उनके लिए "कौन",
जो समझ गए उनके लिए खुली किताब हूँ मैं,
आँख से देखोगे तो खुश पाओगे,
दिल से पूछोगे तो दर्द का सैलाब हूँ मैं,
"अगर रख सको तो निशानी खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं"...

शहर की इस दौड में दौड के करना क्या है?
अगर यही जीना हैं दोस्तों... तो फिर मरना क्या हैं?
पहली बारिश में ट्रेन लेट होने की फ़िकर हैं......
भूल गये भींगते हुए टहलना क्या हैं.......
सीरियल के सारे किरदारो के हाल हैं मालुम......
पर माँ का हाल पूछ्ने की फ़ुरसत कहाँ हैं!!!!!!
अब रेत पर नंगे पैर टहलते क्यों नहीं........
१०८ चैनल हैं पर दिल बहलते क्यों नहीं!!!!!!!
इंटरनेट पे सारी दुनिया से तो टच में हैं.......
लेकिन पडोस में कौन रहता हैं जानते तक नहीं!!!!
मोबाईल, लैंडलाईन सब की भरमार हैं.........
लेकिन ज़िगरी दोस्त तक पहुंचे ऐसे तार कहाँ हैं!!!!
कब डूबते हुए सूरज को देखा था याद हैं??????
कब जाना था वो शाम का गुजरना क्या हैं!!!!!!!
तो दोस्तो इस शहर की दौड में दौड के करना क्या हैं??????
अगर यही जीना हैं तो फिर मरना क्या हैं!!!!!!

Ankhey to pyar me dil ki zuban hoti he ,
Sachi chahat to sada bezuban hoti he ,
pyar me dard bhi miley to kya ghabrana ,
suna he dard se chahat aur jawa hoti he
Jane Kya soch kar lahre sahil se ,
Takra ke laut jati he ,
Samajh me nahi aata vo kinare se bewafai karti he ,
ya laut kar samundar se wafa nibhati he...
Mere Haathon Se Gir Gai Lakire Kahi ,
Bhool Aaye Hum Aapni Takdirey kahi ,
Agar Mile Tumko Kahi Too Utha Lena ,
Mere Hissey Ki Har Khushi Aapne Haathon Pe Saja Lena..
Pyase Ko Ek Katra Pani Kafi He ,
Ishq Me Chaar Pal Ki Zindagi Kafi He ,
Dubne Ko Samandar Me Jaye Kaha ,
Aapki AankhoN Se Tapka Vo Pani Kafi He......
मत इंतज़ार कराओ हमे इतना
कि वक़्त के फैसले पर अफ़सोस हो जाये
क्या पता कल तुम लौटकर आओ
और हम खामोश हो जाएँ

दूरियों से फर्क पड़ता नहीं
बात तो दिलों कि नज़दीकियों से होती है
दोस्ती तो कुछ आप जैसो से है
वरना मुलाकात तो जाने कितनों से होती है

दिल से खेलना हमे आता नहीं
इसलिये इश्क की बाजी हम हार गए
शायद मेरी जिन्दगी से बहुत प्यार था उन्हें
इसलिये मुझे जिंदा ही मार गए

मना लूँगा आपको रुठकर तो देखो,
जोड़ लूँगा आपको टूटकर तो देखो।
नादाँ हूँ पर इतना भी नहीं ,
थाम लूँगा आपको छूट कर तो देखो।

लोग मोहब्बत को खुदा का नाम देते है,
कोई करता है तो इल्जाम देते है।
कहते है पत्थर दिल रोया नही करते,
और पत्थर के रोने को झरने का नाम देते है।

भीगी आँखों से मुस्कराने में मज़ा और है,
हसते हँसते पलके भीगने में मज़ा और है,
बात कहके तो कोई भी समझलेता है,
पर खामोशी कोई समझे तो मज़ा और है...!

मुस्कराना ही ख़ुशी नहीं होती,
उम्र बिताना ही ज़िन्दगी नहीं होती,
दोस्त को रोज याद करना पड़ता है,
क्योकि दोस्त कहना ही दोस्ती नहीं होती
hi friends पापा ने कहा ~** .....दोस्तों से मिलना छोड़ दो **मम्मी ने कहा ** .......घर से निकालना छोड़ दो ***friends ने कहा ** ...........उधार मांगना छोड़ दो ****Girlfriend ने कहा ** .............लड़कियों से बात करना छोड़ दो *****Orkut ने कहा** ...............ये दुनिया ही छोड़ दो ******पारो ने कहा ** .....................शराब छोड़ दो *******लेकिन यार !!** .....................आप से ये किसने कहा कि .........................................................मुझे scrap करना छोड़ दो...????
क्यूं कहते हो मेरे साथ कुछ भी बेहतर नही होता
सच ये है के जैसा चाहो वैसा नही होता

कोई सह लेता है कोई कह लेता है
क्यूँकी ग़म कभी ज़िंदगी से बढ़ कर नही होता

आज अपनो ने ही सीखा दिया हमे
यहाँ ठोकर देने वाला हैर पत्थर नही होता

क्यूं ज़िंदगी की मुश्क़िलो से हारे बैठे हो
इसके बिना कोई मंज़िल, कोई सफ़र नही होता

कोई तेरे साथ नही है तो भी ग़म ना कर
ख़ुद से बढ़ कर कोई दुनिया में हमसफ़र नही होता!
फूलो से कह दो महकना बंद कर दे, की उनकी महक की कोई जरूरत नही....

सितारो से कह दो चमकना बंद कर दे, की उनकी चमक की कोई जरूरत नही....

भवरो से कह दो अब ना गुनगुनाये, की उनकी गुंजन की कोई जरुरत नही....

सागर की लहरे चाहे तो थम जाये, की उनकी भी कोई जरुरत नही....

सुरज चाहे तो ना आये बाहर्, की उसकी किरणो की भी जरुरत नही....

चाँद चाहे तो ना चमके रात भर, की उसके आने की भी जरुरत नही....

वो जो आ गये हैं इस जहाँ में, तो दुनिया मे और किसी और से दोस्ती की जरुरत ही नही
राम का letter सीता के लिए पंजाबी में...

प्यारी सीता,

मैं itthe raji ख़ुशी से हाँ and hope ke tu v ठीक ठाक hovengi,
Laxman रात नु tannu बहुत याद करदा si.
मैं Hanumaan हाथ tannu चिट्ठी bhej reha हाँ,
तू bilkul tension ना layi मैं बहुत jaldi tenu ravan कोलो chuda
lavanga.

मैं AIRTEL दा postpaid ले लिया सी, RAVAN nu मैं mobile te bhot
गालियाँ kadiya te साले ने काट ditta,
चल कोई ni मैंने आना ता है ही. Taan KUTUNGA साले KANJAR nu.
मैं तेरे naal भी एक AIRTEL ka prepaid bhej riya सी usme 1500 SMS free
wali scheme हा, तू रोज़ मेरे को SMS kari.

Chinta ना kari, जब भी gal करने को जी करे, एक miss call मार diyo.
मैं यहाँ से tenu बात कर levenga.
तू मेरे bill दी chinta ना kariyo, Sugreev nu payment दा jimma दे ditta
si.

Accha OK
See U.
With Luv
दशरथ दा Vadda पुत्तर "राम

Tuesday, March 16, 2010

Taslima ek azaadkhayal lekhika hai.unhe pura haq hai kya wah sochti hai usper apni vichaar likhe.Taslima ne apne lekh mein jo bhi likha hai,usse kuch logo ka kehna hai ki hamare dharam ka apmaan hota hai aur iske liye unhe deshnikala ya faasi ki saza di jaye ye kahan tak sahi hai? tab to koi bhi lekhak apne vichaar kisi bhi subject per nahi de payega.
.Zarurat sirf is baat ki hai ki kisi bhi vichaar ka zavab usi rup mein diya jaye.koi lekhak kya likhe kya nahi ye bheed ko tai nahi karna chahiye. AAPKO KYA LAGTA HAI?

शराब में जिन्दगी

  • ये जो गम हैं मेरे, मेरे ही पास रहने दे |
  • जिन्दगी में बाकी ये , जीने की आस रहने दे ||
  • वो मिले या न मिले , उल्फत की शमा जलती रहे |
  • न रहे साथ भले , यादें ही पास रहने दे ||
  • कतरा कतरा शराब में जिन्दगी शामिल है |
  • मय मयस्सर नहीं , महकती हुई सांस रहने दे ||
  • घूँट दो घूँट में साँसे तो महक जाती हैं |
  • जो नशे का है सबब साकी को पास रहने दे ||
  • स्याह जुल्फों के किनारे से टपकता पानी |
  • बूँद मोती सी ये अश्कों के साथ रहने दे ||
  • क्या है रुखसत का सबब कौन पूछे ,जाने |
  • वक़्त आने का कहो ,मिलने की प्यास रहने दे ||
  • ये जुदाई तेरी बर्दाश्त के काबिल न सही |
  • मेरी चाहत है तुझे , इतना ही भरम रहने दे ||

teri yaad

Aaj Ye Kaisi Udaasi Chahyi Hai
Tanhai Ke Badal Se Bheegi Judai Hai
Roya Hai Phir Mera Dil
Jaane Aaj Kiski Yaad Aayi Hai,

Bechain Shaam Ko Udaas Raat Ne Aawaaz Lagayi Hai
Koi Bhooli Hui Baat Phir Yaad Aayi Hai
Dard Uthha Hai Aaj Phir Seene Mein Mere
Jaane Kisne Chott Lagayi Hai,

Apna Samajh Kar Har Khushi Uspe Lutayi Hai
Badle Mein Chaha Pyar Toh Mili Bewafai Hai
Hue Iss Kadar Rusva Hum Ki
Aaj Khud Pe Sharam Aayi Hai,

Uske Intezar Mein Baithi Meri Parchhai Hai
Kuch Sochkar Aaj Phir Aankh Bhar Aayi Hai
Jal Rahi Thi Shama Bade Shaan Se
Jaane Kisne Aakar Bujhayi Hai,

Aaj Wahi Taarikh Lautkar Phir Aayi Hai
Par Wo Nahin Saath Sirf Meri Tanhai Hai
Yahi Sochenge Umr Bhar Ki
Kyon Usne Ki Meri Rusvai Hai.
Roya Hai Phir Mera Dil
Koi Baat Aaj Phir Yaad Aayi Hai.

Tuesday, March 9, 2010

Hindu

'हिन्दू' शब्द मानवता का मर्म सँजोया है। अनगिनत मानवीय भावनाएँ इसमे पिरोयी है। सदियों तक उदारता एवं सहिष्णुता का पर्याय बने रहे इस शब्द को कतिपय अविचारी लोगों नें विवादित कर रखा है। इस शब्द की अभिव्यक्ति 'आर्य' शब्द से होती है। आर्य यानि कि मानवीय श्रेष्ठता का अटल मानदण्ड। या यूँ कहें विविध संसकृतियाँ भारतीय श्रेष्ठता में समाती चली गयीं और श्रेष्ठ मनुष्यों सुसंस्कृत मानवों का निवास स्थान अपना देश अजनामवर्ष, आर्याव्रत, भारतवर्ष कहलाने लगा और यहाँ के निवासी आर्या, भारतीय और हिन्दू कहलाए। पण्डित जवाहर लाल नेहरु अपनी पुस्तक 'डिस्कवरी आफ इण्डिया' मे जब यह कहते है कि हमारे पुराने साहित्य मे तो हि्दू शब्द तो आता ही नहीं है, तो वे हिन्दूत्व में समायी भावनाओं का विरोध नहीं करते। मानवीय श्रेष्ठता के मानक इस शब्द का भला कौन विरोध कर सकता है और कौन करेगा। उदारता एवं सहिष्णुता तथा समस्त विश्व को अपने प्यार का अनुदान देने वाले हिन्दूत्व के प्रति सभी का मस्तक अनायास ही झुक जाता है। हाँ इस शब्द का अर्थ पहले-पहल प्रयोग जिस ग्रंथ में मिलता है, वह आठवीं शदी का ग्रन्थ है 'मेरुतन्त्र'। इसमें भी हिन्दू शब्द का अर्थ किसी धर्म विशेष से नहीं हैं । इसके तैतीसवें अध्याय में लिखा है "शक एवं हूण आदि का बर्बर आंतक फैलेगा। अतः जो मनुष्य इनकी बर्बरता से मानवता की रक्षा करेगा वह हिन्दू है"। मेरुतन्त्र के अतिरिक्त भविष्य पुराण, मेदिनी कोष, हेमन्त कोसी कोष ब्राहस्पत्य शास्त्र, रामकोष, कालिका पुराण , शब्द कल्पद्रुम अद्भुत रुपकोष आदि संस्कृत ग्रंन्थो में इस शब्द का प्रयोग मिलता है। ये सभी ग्रंन्थ दसवीं शताब्दी के आस पास के माने जाते है।
इतिहासकारों एंव अन्वेषण कर्ताओ का एक बड़ा वर्ग इस विचार से सहमत है कि हिन्दू शब्द का प्रेरक सिन्धु नदी है। डा० वी डी सावरकर की पुस्तक 'स्लेक्ट इन्सक्रिप्सन' में कहा गया है, सिन्धु नदी के पूर्वी एवं पश्चिमी दिशाओ के बीच के क्षेत्र एंव पश्चिमी दिशाओं के बीच के क्षेत्र के निवासियों को फारस अर्थात वर्तमान ईरान के शासक जिरक एंव दारा हिन्दू नाम से पुकारते थे। आचार्य पाणिनी ने अष्टाध्यायी में सिन्धु का अर्थ व्यक्तियों की वह जाती बतायी है, जो सिन्धु देश में रहते हैं। पण्डित जवाहर लाल नेहरु के अनुसार हिन्दू शब्द प्रत्यक्षतः सिन्धु से निकलता है, जो इसका पुराना और नया नाम है। इसी सिन्धु शब्द से हिन्दू, हिन्दुस्थान या हिन्दुस्तान बने है और इण्डस इण्डिया भी। समकालीन इतिहासकार हिन्दू को फारसी भाषा का शब्द मानते है। फारसी भाषा में हिन्दू एंव हिन्दू से बने अनेक शब्द मिलते है। हिन्दुवी, हिन्दनिया, हिन्दुआना, हिन्दुकुश, हिन्द आदि फारसी शब्दो में यह झलक देखी जा सकती है। फारस की पुरब दिशा का देश भारत ही वास्तव मे हिन्द था।

वर्तमान भारत, पाकिस्तान बंग्लादेश एवं अफगानिस्तान इसी क्षेत्र का भाग है। फारसी शब्दावली के नियमानुसार संस्कृत का अक्षर 'स' फारसी भाषा के अक्षर 'ह' में परिवर्तित हो जाता है। इसी कारण सिन्धु शब्द परिवर्तित होकर हिन्दू हो गया। हिन्दू शब्द जेन्दावेस्ता या धनदावेस्ता जैसी फारसी की प्राचीन धार्मिक पुस्तक में सर्वप्रथम मिलता है। संस्कृत एवं फारसी भाषा के अतिरिक्त भी अनेकों ग्रंन्थो में हिन्द या हिन्दू शब्द का प्रयोग किया गया है।

श्री वासुदेव विष्णुदेवदयाल ने अपनी पुस्तक 'द एसेन्स आफ द वेदाज एण्ड एलाइड स्क्रिपचर्स' में पृष्ठ ३-४ पर आचार्य सत्यदेव वर्मा ने 'इस्लामिक धर्म ग्रंन्थ पवित्र कुरान के संस्कृत अनुवाद की भूमिका में श्रीतनसुख राम ने अपनी पुस्तक 'हिन्दू परिचय' के पृष्ठ ३१ पर लिखा है कि अरबी भाषा के एक अँग्रेज कवि लबी बिन अखतब बिन तुरफा ने अपने काव्य संग्रह में हिन्द एंव वेद शब्द का प्रयोग किया है। ये महान कवि इस्लाम से २३०० वर्ष पूर्व हुए है। अरबी 'सीरतुलकुल' में हिन्दू शब्द का मिलना यह अवश्य सुनिश्चित करता है कि यह शब्द यूनान, फारस एंव अरब देशों में प्रचलित था और यह भी कि विश्व की परीक्रमा में विभाजित अधिकतर समकालीन राष्ट्र इस शब्द को धर्म विशेष अथवा सम्प्रदाय विशेष के अर्थ में नहीं बल्कि सद् गुण सम्पन्न मानव जाति या क्षेत्र विशेष के अर्थ में प्रयोग करते थे।
हिन्दू शब्द से मानवीय आदर्शो का परिचय मिलता है। साथ ही सिन्धु क्षेत्र सम्बन्धित होने के कारण इससे हम अपना राष्ट्रीय परिचय भी पाते है। हिन्दू शब्द को जब हम साम्प्रदायिकता संकीर्णताओं से जोड़ते है तो हम अपनी महानता, विशालता एवं गर्व को संकुचित मानसिकता मे बन्दी बना देना चाहते है। भारत में अपना अस्तित्व रखने वाले सभी धर्मों, सम्प्रदायों की मान्यताएँ एंव उपासना विधि भाषा, वेशभुषा, रीतिरिवाज, धार्मिक विश्वास भले ही आपस मे न मिलते हो, परन्तु सभी अपना सम्मिलित परिचय एक स्वर में गाते हुए यही देते है, सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तान हमारा । हो भी क्यों न, हिन्दू और हिन्दुस्तान इन सभी जातियों प्रजातियों एवं उपजातियों की मातृभूमी है। जहाँ सभी को रहने का समान अधिकार है।

मानवीय गौरव के प्रतीक इस शब्द से अपना नाता जोड़ने में महाराणा प्रताप एवं शिवाजी सरीखे देशप्रेमियों ने गर्व का अनुभव किया। गुरु गोविन्दसिंह ने भी इस शब्द के निहितार्थ का भावबिभोर होकर गान किया है। शब्द कल्पद्रुम के अनुसार हीन दुष्याति इति हिन्दू अर्थात जो अपनी हीनता एवं बुराई को स्वीकार कर उसे छोड़ने के लिए तैयार होता है वह हिन्दू है। 'द धर्मस्मृति' के अनुसार हिंसा से बचने वाला , सदाचारी ईश्वर की राह पर चलने वाला हिन्दू है। आचार्य माधव के अनुसार ओंकार मूलमन्त्र मे आस्था रखने वाले हिन्दू होते है। आचार्य बिनोबा भावे का कहना था, वर्णाश्रम को मानने वाला, गो सेवक, वेदज्ञान का पुजारी , समस्त धर्मो को सम्मान देने वाला , दैवी शक्तियों का उपासक , मोक्ष प्राप्ति की जिज्ञासा रखने वाला जीवन में आत्मसात करने वाला ही हिन्दू है। आज बदले हुए परिवेश में मान्यताएँ बदली हुई हैं। कतिपय चतुर लोग बड़ी चतुराई से अपने स्वार्थ के लिए, अहं की प्रतिष्ठा के लिए शब्दों का मोहक जाल बिछाते रहते है। बहेलिए की फाँसने वाली वृत्ति, लोमड़ी की चाल की अथवा फिर भेड़ियों की धूर्तता कभी उन आदर्शो को स्थापित नहीं कर सकती जिनकी स्थापना के लिए इस देश के सन्तो, ऋषियों, बलिदानियों ने अपने सर्वस्व की आहुति दे दी।

हिन्दुत्व की खोज आज हमें आदर्शवादी मान्यताओं में करनी होगी। इसमें निहित सत्य को मानवीय जीवन की श्रेष्ठता मे, सद् गुण-सम्वर्धन में खोजना होगा। धार्मिक कट्टरता एंव साम्प्रसायिक द्वेश नहीं 'वसुधैव कुटुम्ब कम्' का मूलमंत्र है। यह विवाद नहीं विचार का विषय है। स्वार्थपरता एंव सहिष्णुता अपनाकर ही हम सच्चे और अच्छे इन्सान बन सकते है। मानवीय श्रेष्ठता का चरम बिन्दु ही हमारे आर्यत्व एवं हिन्दुत्व की पहचान बनेगा,।

vande matram

हाँ तो मेरा कहना है जो ना गायें वन्दे मातरम वह देश का गद्दार हैऔर आप ही बताईये गद्दार क्यों ना कहा जाये उसे। अरे जरा अपनी आँखे और दिमाग खोलो ध्यान से सूनों, जिस देश में रहते हो जहाँ की खाते हो जहाँ की पहनते हो, जिस देश नें तुम्हे सर ढकने के लिए छत और सोने के लिए जमीन दी , उसको समर्पित दो शब्द कहने की बारी आयी तो ये कहके इंकार करना कि ये धर्म विरोधी है। तो एक बार फिर मैं कहता हूँ ऐसे लोगो को डुब मरना चाहिए वहाँ जहाँ सुखा पड़ा हो, चूल्लु भर पानी भी ज्यादा है इनके लिए। मैं ये नहीं कहता कि ये बस मुस्लिम पर लागू हो, बल्कि हर उस शख्स के लिए जो भारत माता को इज्जत देने से इंकार करता हो। ये बात ठिक है कि आपके धर्म में मुर्ति पूजन नहीं माना जाता तो आप पूजा ना करिए, उसके लिए आपसे कोई जोर जबरजस्ती नहीं कर रहा है, लेकिन ये कहना की ये धर्म विरोधी है तनिक भी ठिक ना होगा। बात साफ है हो सकता बहुत दिनों से बहुत से लोग इस गान का विरोध कर रहे हों, लेकिन प्रत्यक्ष रुप से अब हो रहा है। ये भी ठीक है कि वन्दे मातरम कहने मात्र से कोई देशभक्त नहीं बन जाता , आप देश में रहकर देश के लिए कुछ भी भला मत करिये, लेकिन जैसे ही आप देश के विरोध में कुछ करेंगे तो आपको देशद्रोही तो कहा ही जायेगा। अगर देश के लिए कुछ कर नहीं सकते तो कम से कम उसका विरोध मत करिये।

Monday, March 8, 2010

Pyar woh hamko bepanah kar gaye,
phire zindagi me hamko tanha kar gaye,
chahat thi unki ishq me fanah hone ki,
magar woh laut kar anese mana kar gaye....

mere khuda khushi de unhe,
humne to aansuon ki chahat ki hai,
wo mujhe bhula de ye haq hai unhe,
hamari baat alag hai humne to mohobbat ki hai...........

Teri chaukhat se sar uthaon to bewafa kehna,
Tere siwa kisi ko dil mein basaon to bewafa kehna,
Tujhe agar meri wafa per shak hai to uthalo khanjar
Main shauk se na mar jaaon to bewafa kehna…!

Usne puchha kyun laal hai aankhen teri,
maine kaha kal raat so na saka tha…
laakh chahoon par yeh keh na sakunga,
khwahish thi rone ki par ro na saka tha…!!!

Chahenge tumhe par kabhi ruswa na karenge.
Saye se bhi apne kabhi shikwa na karenge.
Puchhenge hawaon se ghataon se tera haal,
Milne ki kabhi dua na karenge...!!!

Yoon Na Kheench Apni Taraf Be-bas Kar Ke...
Kahin Aisa Na Ho Ke Khud Say Bicharr Jaoon Aur Tum Bhi Na Milo

Sunday, March 7, 2010

cOUPLE oF aNKUR-nEHA






Neha ne purna viram diya,
Ankur ke chyan prabandho ko;
Purvanchal ka hai sath mila,
Kayastha-kul ke ksham kandho ko;
swar Neha, shabad Ankur is parinay ka bhavarth yahi;
ganga ji ki dhar mili hai gomti ke tatbandho तट-बंधो ko;
jab tak nabh mein suraj hai ,jab tak sumanit dhara rahe;
he priya(ANKUR-NEHA) tumhara saath hamesha bana rahe;
main (ABHISHEK) kalam sadhko ke kul se hu,
jyesthya tumhara pita tulya;
he! anuj-vadhu (Neha) ashish tumhe,
Sindur hamesha hara rahe.

Friday, March 5, 2010

विडम्बना भारत की है, अथवा केवल भारतियों की

जो भारत को भारत कहते, और स्वयं को भारतीय

बाकी सब के लिए नहीं है, यहां विडम्बना कोई

सब कुछ जायज इस देश में, बस हिन्दु न बोलें

सारे खोलें मुँह अपना, पर हिन्दु मुँह न खोलें

क्यों ऐसा विचार उपजा है, अपने इस भारत में

कौन है दोषी इन वृतियों का, कौन जो इनको पाले

अभी समय यह नहीं, कि इन प्रश्नों को हम उछालें

पर कब तक हिन्दु, अपने मुँह पर डालेंगे ताले

जो हिन्दु की बात है करता, वह सामप्रदायिक कहलाता

पर जो मुसलिम क्रिष्चियन की करता, असामप्रदायिक कहलाता

किस डिक्शनरी में दुनिया की, ऐसा लिखा हुआ है

आओ समझें ऐसे ऐसे, ढोंग चलाने वालों को

आओ समझें ऐसे ,मुँह में राम, बगल में छुरी चलाने वालों को

क्या राम का नाम भी लेना, यहाँ हुआ है मुश्किल

बात राम के मंदिर की करना, फिर कैसे हो संभव

कैसे काले अंग्रेजों ने, भारत को ठगा हुआ है

बहुत हुआ अत्याचार यहाँ पर, अब इसकी न और जगह है

खोलो आँखें, खोलो बुद्धि के पट अपने

अपने अधिकारों को समझो, स्वाभिमान को समझो

सम-दृष्टि यह नहीं, कि हिन्दु अपनी आँखें फोड़ें

दुनिया भर की जय करें, पर अपनी जय न बोलें

तो फिर वोट उसी को देना, जो अब अपनी जय भी बोलें


Bhukha bachcha ma se lipta sukha istan chat raha ho,
aur galiyare mein betha kutta ,dudh malai kat raha ho,
jab tadap tadap kar nikal jate ho pran pyare ,
to bolo bharat ka jan jaker kiske dwar pukare,
jab foji ghere mein koi mantri janvandan karta hai,
tab sansad mein aag lagane ka apna bhi man karta hai.

Jab aankh kisi ravan ki sita par tik jati ho ,
thaki karz se bhojil sita roti par hi bik jati ho
aur ram ,ram aankh tarer kar raha jata ho,
sara tap pasina bankar paththar par hi bah jata ho,
jab paththar hi paththar ko sulgane ka ayojan karta hai ,
tab tab sansad mein aag lagane ka apna bhi man karta hai ………………

jab jab dhyut shabha(jua) sajti hai dhuryodhan bhanna sa jata hai,
mahanagar ke chorahe par sannata sa jha jata hai,
dhrupat suta jab dhyut shabha mein kate ped si dah jati ho,
arjun ka gandiv aur bhim ki gada dhari si rah jati ho,
jab dhussan dhrupat suta ka cheer haran manchan karta hai ,
tab tab sansad mein aag lagane ka apna bhi man karta hai.

arjun vijay darp mein aitha rajmahal mein jhum raha ho,
aur eklavya kata angutha laker van van mein ghum raha ho,
jab guru dhron ka gyandeep rajmahal mein jalta ho
aur sara gyan chand tukdo par hi bik jata ho,
jab jab koi dron eklavya ka shakti bandhan karta hai,
tab tab sansad mein aag lagane ka apna bhi man karta hai

Tuesday, March 2, 2010

मै न जानूँ कि कौन हूँ मैं
लोग कहते हैं सबसे जुदा हूँ मैं
मैंने तो प्यार सबसे किया
पर न जाने कितनों ने धोखा दिया।

चलते-चलते कितने ही अच्छे मिले,
जिनको बहुत प्यार दिया,
पर कुछ लोग समझ ना सके,
फिर भी मैंने सबसे प्यार किया।

दोस्तों की खुशी से ही खुशी है,
तेरे गम से हम दुखी है,
तुम हँसो तो खुश हो जाऊँगा।
तेरी आँखों में आँसू हो तो मनाऊँगा।

मेरे सपने बहुत बड़े है
पर अकेले है हम, अकेले है,
फिर भी चलता रहूँगा
मंज़िल को पाकर रहूँगा।

ये दुनिया बदल जाए कितनी भी,
पर मैं न बदलूँगा,
जो बदल गए वो दोस्त थे मेरे
पर कोई न पास है मेरे।

प्यार होता तो क्या बात होती
कोई न कोई तो होगी कहीं न कहीं
शायद तुम से अच्छी या
कोई नहीं इस दुनिया में तुम्हारे जैसी।

आसमान को देखा है मैंने, मुझे जाना वहाँ है
ज़मीन पर चलना नहीं, मुझे जाना वहाँ है,
पता है गिरकर टूट जाऊँगा, फिर उठने का विश्वास है
मैं अलग बनकर दिखाऊँगा।

पता नहीं ये रास्ते ले जाएँ कहाँ,
न जाने ख़त्म हो जाएँ, किस पल कहाँ,
फिर भी तुम सब के दिलों में ज़िंदा रहूँगा,
यादों में सब की, याद आता रहूँगा।

Meri tanhai bhi,
fasana dhund leti hai,
Badi shatir hai ye duniya,
Bahana dhund leti hai,
Hakiqat jid kiye baithee hai,
chaknachur karne ko
magar aankh hai ki sapna suhana dhund leti hai.
Rehne de Aasma, Zamin ki talash kar,
Sab kuch yahi hai, Na kahi aur talash kar.
Har Aarzu puri ho to jine ka kya maza hai,
Jeene ke liye bas ek kami ki talash kar.