Sunday, May 29, 2011

sharam aati hai

संसद के दरवाजो से चीत्कार सुनाई देती है
कुछ खोटे पापी सिक्को की अब हार सुनाई देती है,
मेरा जन-गन वाला भारत भूखा प्यासा बैठा है,
सविधान का रखवाला कुर्सी पर बैठा एठा है
कोई तिरंगा चीर रहा है सरे आम बाजारों में,
कोई मसीहा पूज रहा है एटम बम हथियारों में,

कोई कोई मेरे देश का सौदा करने लगता है,
कोई विदेशी मुद्रा अपने मठ में भरने लगता है,
कोई भारतवासी अपने घर में भूखा सोता है,
रोटी एक कमा के लाता बच्चा खाके सोता है
कोई कुछ कुछ मिला रहा है नमक दाल और शक्कर में
कोई सोनावाड़े जला है माफ़िआओ के चक्कर में

कोई विधवा के फ्लैटों को अपना कहना लगता है,
कोई मवाली हत्यारा संसद में रहने लगता है
कोई खबरे भेज रहा है गैर पडोसी देशो में,
कोई जीवन दूढ़ रहा है बचे हुए अवशेषों में
कोई उची कुर्सी वाला हाथ जोड़ रह जाता है
और करोडो का घोटाला ए-राजा कर जाता है

काला धन मेरे भारत का पड़ा विदेशी मुल्को में
जासूस खबरे बेच रहा है नाम मात्र के शुल्को में
कही जले है लाखो गाँधी सच्चाई के कारण जी
जन गन मन का नहीं करपाते नेता कुछ उच्चारण जी
देश प्रेम का ढोंग घिनोना ढोंगी मोह को देखो जी
बापू जी की पुन्य तिथि पर फैशन शो को देखो जी

मैंने तो हरदम कोसा है भ्रस्टाचारी ताकत को
जी मै गद्दारी कहता महगाई और मिलावट को
कोई नेता नाचे नंगा नेहरु वाली धरती पे
कोई ताली पीट रहा है भारत देश की अर्थी पे
कोई ठुमके लगा रहा है फैशन वाले रैम्पो पर
कोई किडनी चुरा रहा है मुफ्त चिक्तिसा कैम्पों पर

सोने की चिड़िया का हिंद आवाज लगता सुन लो जी
दीन हीन अध् मारा पड़ा फ़रियाद सुनाता सुन लो जी
मुझको तो केवल लूटा है सत्ताधारी ताकत ने
और सुंहागा लगा दिया है हिंसा लूट मिलावट ने
शब्दों में जो बध न पाये ऐसी मेरी हालत है
डूब मरो ए गद्दारों ये गाँधी वाला भारत है

ऊँगली उठाना घाव कुरेदना यही लक्ष्य नहीं मेरा जी
भारत देश लुटेरो का ही नहीं सिर्फ एक डेरा जी
यहाँ अब भी बचे हुए है गाँधी के विचार जी
इधर उधर बिखर रहे गाँधी के विचार जी
विश्वास नहीं टूटा अब तिलक घोख्ले बुद्धो पर
देश भक्त अब सोच रहे है नवनीति के मुद्दों पर

हम भी आये तुम भी आओ करने सोच विचार जी
भ्रस्टाचारी पापिओ का करदे का तमाम जी
रोके मिलावट खोरी चीजो की चोर बाजारी को
उत्पादन खूब बढ़ा के अपना भूले हम लाचारी को
संसार शिरोमणि था ये देश फिर से बने महान जी
मेरा भारत प्यारा भारत जाए न इसकी शान जी
मेरा भारत प्यारा भारत जाए न इसकी शान जी

Saturday, May 28, 2011

4 june 2011 part 2

बड़ी कंपनी ठेका लेकर , जंगल के जंगल साफ़ करे
एक पेड भी आप ने काटा , क़ानून कभी ना माफ़ करे

ऐसे हजार क़ानून पुराने , जनता आज भी झेल रही -२
और सरकारें बैठ मजे से , 2 जी 3 जी खेल रही

न्याय नहीं है न्यायालों में , जब भी माँगा तारीख मिली -२
भोपाल कांड एक बड़ा उदाहरण , ना सजा मिली ना सीख मिली

साढ़े तीन सो साल लगेंगे, पैंडिंग केस निपटने में
न्याय व्यवस्था बुरे हाल में, देखा सारे ज़माने ने

क्यों हमे खिलाये जाती है, विकसित देशो की बैन दवा
क्यों नकली दवा के सौदागर , कभी न पाते कोई सजा

क्यों करदाता के खर्चे पर , आतंकी बिरयानी खाते हैं
क्यों उन्हें जवाई बना कर के , हम खुद साले बन जाते हैं

फाँसी का कानून बने, जो कोई भ्रष्टाचार करे -२
मिलावट करने वालों को , और जो कोई बलात्कार करे

ऐसे सख्त कानून बिना , अब बात ना बनने वाली है -२
जाग उठे हैं लोग देश में, आंधी चलने वाली है

4 june 2011

जाग उठे हैं लोग देश में, आंधी चलने वाली है
भूख और भ्रष्टाचार में डूबी, रात गुजरने वाली है

चार जून को राम देव जी, दिल्ली को ललकारेंगे -२
हम भी बाबा साथ तुम्हारे , लाखों लोग पुकारेंगे

लाखों लोग करेंगे अनशन, ऐसी क्या मज़बूरी है -२
जो नहीं जानते गौर करे , ये मुद्दे बहुत जरुरी है

दुनिया के बाकि देशों में, नहीं चलते नोट हजारी है -२
क्यों भारत में हैं बड़े नोट , भारत की क्या लाचारी है

बड़े नोट ही नकली छपते , छोटे नोटों में घाटा है -२
नकली नोट का देश में आना , अपने मुहं पर चांटा है

भ्रस्टाचारी के घर दफ्तर , रेड जहाँ भी मारी है -२
रजाई , गद्दे , तकियों तक से , निकले नोट हजारी है

बड़े नोट गर बंद किये तो , आतंकी खुद मर जायंगे -२
नकली नोट नहीं होंगे, तो बन्दूक कहाँ से लायेंगे

बड़े नोट बंद करवाना , नहीं मुद्दा कोई निराला है -२
हुआ तीन बार भी पहले , ये फिर से होने वाला है

बड़े नोटों को बंद करो , ये पहली मांग हमारी है -२
पड़ा जो इसकी खातिर मरना , इसकी भी तयारी है

फिर ना समझना बेवकूफ है -२ , जनता भोली भाली है -२
जाग उठे हैं लोग देश में, आंधी चलने वाली है
भूख और भ्रष्टाचार में डूबी, रात गुजरने वाली है

आजादी के बाद देश को, नेता इतना लूट गए -२
खादी से विश्वाश के अपने , धागे सारे टूट गए

भ्रष्टाचारी नेता अधिकारी , भारत को खाते जाते हैं
लूट लूट के देश का पैसा , स्विस बैंक पहुंचाते हैं

स्लम डोग हम कहलाते , गिनती होती कंगलो में -२
क्योंकि, 400 लाख करोड़ खा गए नेता , पिछले पैंसठ सालो में

जहाँ डाल डाल पर सोने की चिड़िया करती थी बसेरा -२
वहां भूख के कारण एक मिनट में , मरते लोग है तेरह

भूख तोडती लोगों के धरम , धर्य , ईमान को -२
नक्सलवादी बना दिया , भूखे मरते इंसान को

स्विस बैंक में जमा खजाना जब वापस आ जायगा -२
अर्थ व्यवस्था चमकेगी , हर भूखा खाना खायेगा

UN बिल को पास करो , जो काले धन को लायेगा
जब पैसा वापस आ जाएगा , हर गाँव करोडो पायेगा

रुपया आसमान में होगा , कीमत पर इतराएगा
डॉलर उसका होगा चाकर , पैर दबाने आएगा

लोकपाल जनता की लाठी , मारो तो आवाज भी है -२
जाँच सभी की हो चाहे , देश का वो सरताज भी है

लोकपाल कमजोर बने , ये दाळ ना गलने वाली है -२
जाग उठे हैं लोग देश में, आंधी चलने वाली है
भूख और भ्रष्टाचार में डूबी, रात गुजरने वाली है

अंग्रेज गए जब भारत से , आजादी हमको सोंप गए
जितने भी क़ानून थे काले , सारे हम पर थोप गए

34735 पुराने कानूनों में से कुछ उदाहरण देखे :-

कहने को आजाद है भारत , पर क़ानून पुराने है
भट्ठा और परसोल के किस्से , सब लोगों ने जाने हैं

IPC और पुलिस एक्ट , और जाने कितने क़ानून यहाँ
भारत माँ के स्वाभिमान का , हर दिन करते खून यहाँ

फसलों की कीमत आज के दिन भी , तय करते अधिकारी है
इनकम टैक्स के भेद समझना , सर दर्द बड़ा ही भारी है

बड़ी कंपनी ठेका लेकर , जंगल के जंगल साफ़ करे
एक पेड भी आप ने काटा , क़ानून कभी ना माफ़ करे

ऐसे हजार क़ानून पुराने , जनता आज भी झेल रही -२
और सरकारें बैठ मजे से , 2 जी 3 जी खेल रही

न्याय नहीं है न्यायालों में , जब भी माँगा तारीख मिली -२
भोपाल कांड एक बड़ा उदाहरण , ना सजा मिली ना सीख मिली

साढ़े तीन सो साल लगेंगे, पैंडिंग केस निपटने में
न्याय व्यवस्था बुरे हाल में, देखा सारे ज़माने ने

क्यों हमे खिलाये जाती है, विकसित देशो की बैन दवा
क्यों नकली दवा के सौदागर , कभी न पाते कोई सजा

क्यों करदाता के खर्चे पर , आतंकी बिरयानी खाते हैं
क्यों उन्हें जवाई बना कर के , हम खुद साले बन जाते हैं

फाँसी का कानून बने, जो कोई भ्रष्टाचार करे -२
मिलावट करने वालों को , और जो कोई बलात्कार करे

ऐसे सख्त कानून बिना , अब बात ना बनने वाली है -२
जाग उठे हैं लोग देश में, आंधी चलने वाली है
भूख और भ्रष्टाचार में डूबी, रात गुजरने वाली है

छोटे उद्श्यों में फंस कर , ना जीवन बेकार करो -२
25 करोड़ भूखे हैं हर दिन , उनका थोडा विचार करो

चुपचाप बैठ के अपने घर में , ना सिस्टम पर क्रोध करो
या बाबा के साथ में आओ , या उनका विरोध करो

गर समझो बाबाजी ठीक कहैं
सच भी होकर निर्भीक कहैं

बाबा हम भी साथ तुम्हारे , जब नि`कले मुख से ये बोल -२
टोल फ्री एक नंबर ले लो , कर देना उस पर मिस कोल

अब उठो समर्थन दो उनको , वर्ना देश प्रेम ये जाली है -२
जाग उठे हैं लोग देश में, आंधी चलने वाली है
भूख और भ्रष्टाचार में डूबी, रात गुजरने वाली है
वन्दे मातरम || वन्दे मातरम || वन्दे मातरम || वन्दे मातरम || वन्दे मातरम
एक दिन कलम ने आके चुपके से मुझसे ये राज खोला ,

कि रात को भगत सिंह ने सपने में आकर उससे बोला,

कहाँ गया वो मेरा इन्कलाब कहाँ गया वो बसंती चोला ?

कहाँ गया मेरा फेंका हुआ, मेरे बम का वो गोला ?

आत्मा ने भगत के आकर कहा , ये देख के हम बहुत शर्मिंदा हैं,

कि देश देखो आज जल रहा है,और जवान यहाँ अभी भी जिन्दा हैं ??

देख के वो रो पड़ा इस देश की अंधी जवानी ,

क्या हुआ इस देश को जहाँ खून बहा था जैसे हो पानी ,

खो गया लगता जवान आज जैसे शराब में ,

खो गया आदतों में उन्ही , जो आते हैं खराब में ,

कीमतें कितनी चुकाई थी हमने, ये तो सब ही जानते हैं

तो फिर इस देश को हम आज , क्यूँ नही अपना मानते हैं ?

देश के संसद पे आके वो फेंक के बम जाते हैं ,

और खुदगर्जी में हम सब उन्हें अपना मेहमां बनाते हैं ,

भूल गये हो क्या नारा तुम अब इन्कलाब का ???

जो पत्थरों के बदले में भी थमाते हो फुल तुम गुलाब का ?

मानने को मान लेता मानना गर होता उसे ,

जान लेता हमारे इरादे गर जानना होता उसे ,

आँखों में आंसू आ गया, देख के अब ये जमाना ,

लगता है आज बर्बाद अब , हमको अपना फांसी लगाना ,

ऐ जवां तुम जाग जाओ तुम्हे देश ये बचाना होगा ,

आज आजाद और भगत बन के तुम्हे ही आगे आना होगा

ऐ जवां तुम्हे नहीं खबर ,कि जब-जब चुप हम हो जाते हैं

देश के दुश्मन हमे तब-तब, नपुंसक कह- कह कर के बुलाते हैं

उठो और लिख दो आज फिर से, कुछ और कहानियाँ ,

कह दो जिन्दा हैं अभी हम और सोयी हैं नही जवानियाँ,

गर लगी हो जवानी में, जंग, तो हमसे तुम ये बताओ ,

या खून में उबाल हो ना , तो भी बस हमसे सुनाओ

एक बार फिर से हम इस मिटटी के लाल बन के आयंगे ,

एक बार इस देश को अपनों के ही गुलामी से हम बचायेंगे ,

नारा इन्कलाब का हम फिर से आज लगायेंगे ..

पर ये सवाल हम आप से फिर भी बार-बार दुहराएंगे

कि आखिर कब तक ?? आखिर कब तक ?

इस देश के जवां कमजोर और बुझदिल कहलाते जायंगे.....

इसको बचाने खातिर कब, तक भगत सिंह और आजाद यहाँ पर आयंगे ???

Monday, May 9, 2011

rahat indori

बीमार को मर्ज़ की दवा देनी चाहिए
वो पीना चाहता है पिला देनी चाहिए

अल्लाह बरकतों से नवाज़ेगा इश्क़ में
है जितनी पूँजी पास लगा देनी चाहिए

ये दिल किसी फ़कीर के हुज़रे से कम नहीं
ये दुनिया यही पे लाके छुपा देनी चाहिए

मैं फूल हूँ तो फूल को गुलदान हो नसीब
मैं आग हूँ तो आग बुझा देनी चाहिए

मैं ख़्वाब हूँ तो ख़्वाब से चौंकाईये मुझे
मैं नीद हूँ तो नींद उड़ा देनी चाहिए

मैं जब्र हूँ तो जब्र की ताईद बंद हो
मैं सब्र हूँ तो मुझ को दुआ देनी चाहिए

मैं ताज हूँ तो ताज को सर पे सजायें लोग
मैं ख़ाक हूँ तो ख़ाक उड़ा देनी चाहिए

सच बात कौन है जो सरे-आम कह सके
मैं कह रहा हूँ मुझको सजा देनी चाहिए

सौदा यही पे होता है हिन्दोस्तान का
संसद भवन में आग लगा देनी चाहिए

Wednesday, May 4, 2011

aakhri baat

माँ जो बादल सीमा पार से आये.संग में गोलियों की बरसात जो लाये.
एक बूंद मुझे भी भिगो गयी. माँ मुझे एक गोली लग गयी.

देश की लौ बुझाने ये वर्षा थी आई. माँ फिर भी लौ बुझ ना पाई.
एक- एक बूंद खून की दीया जलाती रही. माँ मुझे एक गोली लग गयी.

भीगने का दर अब मुझे नहीं था. उदित हो सूरज ये अब मन में था.
माँ मेरी गोलियां बादलों को छेदती रही. माँ मुझे एक गोली लग गयी.

प्रवाह तेरे दूध का मेरी धमनियों में था. कुछ कर गुजरने का जज्बा मेरी आँखों में था.
ऐसा लाया तूफान जो बादलों को उड़ा ले गयी.माँ मुझे एक गोली लग गयी.

अँधेरे को दूर भगा दिया मैंने. सूरज की तपन महसूस की मैंने.
माँ अब साँसे मेरी उखड़ने लग गयी. माँ मुझे एक गोली लग गयी.

माँ अब नींद सताने लगी थी. ऑंखें तेरी गोद तलाशने लगी थी.
प्राण गए पर तुझे देखने ऑंखें खुली रही.माँ मुझे एक गोली लग गयी.

"जो थे माँ तेरे कंधे वो चार कन्धों में आयेंगे.
मुझ मालुम है तेरे आँशु अब न थमने पाएंगे."

"दुनिया में आते देखा तुने मुझे, अब दुनिया से जाते देखना होगा.
मुझे जो गोली लगी माँ. उससे सवाल पूछना होगा."

"कितना रक्त पीयेगी तू. कितनी गोद करेगी सुनी.
दोनों पार बेटे मरते हैं. माँओं की गोद होती सुनी."

Tuesday, May 3, 2011

jaljalaa

अब शाहों का सिंहासन, जल्‍दी थर्राने वाला है,
मिजाजे आम हैं बिगड़ा, बवंडर आने वाला है।

बड़ी ही देर से सही, मगर आवाज तो आई,
यहाँ उजले लिबासों में छिपा हर हाथ काला है।

हया बेच कर खाई, अमीरों और वजीरों ने,
तमाशे हैं यहाँ सस्‍ते, मगर महगाँ निवाला है।

हमें ठंडा समझने की, तुमने कैसे की गुस्‍ताखी,
जवां हैं मुल्‍क हिन्‍दोस्‍तां, अभी तनमन में ज्‍वाला है।

जाओगे अब कहाँ बचकर, यहीं पर टेक लो माथा,
यहाँ आवाम मस्‍जिद हैं, यहाँ जनता शिवाला है।