Friday, July 30, 2010

मोहब्बत का सितारा

किसी की आँखों मे मोहब्बत का सितारा होगा
एक दिन आएगा कि कोई शक्स हमारा होगा

कोई जहाँ मेरे लिए मोती भरी सीपियाँ चुनता होगा
वो किसी और दुनिया का किनारा होगा

काम मुश्किल है मगर जीत ही लूगाँ किसी दिल को
मेरे खुदा का अगर ज़रा भी सहारा होगा

किसी के होने पर मेरी साँसे चलेगीं
कोई तो होगा जिसके बिना ना मेरा गुज़ारा होगा

देखो ये अचानक ऊजाला हो चला,
दिल कहता है कि शायद किसी ने धीमे से मेरा नाम पुकारा होगा

और यहाँ देखो पानी मे चलता एक अन्जान साया,
शायद किसी ने दूसरे किनारे पर अपना पैर उतारा होगा

कौन रो रहा है रात के सन्नाटे मे
शायद मेरे जैसा तन्हाई का कोई मारा होगा

अब तो बस उसी किसी एक का इन्तज़ार है,
किसी और का ख्याल ना दिल को ग़वारा होगा

ऐ ज़िन्दगी! अब के ना शामिल करना मेरा नाम
ग़र ये खेल ही दोबारा होगा

जानता हूँ अकेला हूँ फिलहाल
पर उम्मीद है कि दूसरी ओर ज़िन्दगी का कोई और ही किनारा होगा

Thursday, July 29, 2010

Maa

मौत के आगोश में जब सो जाती है माँ ,
तो कही जा के थोडा सा सकूँ पाती है माँ ,
रूह के रिश्तों की ये गहरायिया तो देखिये ,
चोट लगती है हमे और चिल्लाती है माँ ,
मांगती है कुछ नहीं अपने लिए भगवन से ,
अपने बच्चो के लिए दमन को फैलाती है माँ ,
प्यार कहते है किसे और ममता क्या चीज़ है ,
कोई उन बच्चो से पूछे जिन की गुज़र जाती है माँ ,
चाहे हम खुशिओं में माँ को भूल जाएँ दोस्तों,
जब मुसीबत सर पे आती है तू बहुत याद आती है माँ.

Wednesday, July 14, 2010

१९८९ में sc/st एक्ट का गठन दलित वर्ग के लोगो को सुरक्छा देने के लिए किया गया था; लेकिन आज कल दलित तबके के बहुतायत लोग इस क्रूरता अधिनियम का दुरूपयोग कर रहे ; उनके द्वारा इस दुरूपयोग का मुख्य कारण है इसके (sc/st एक्ट) अंतर्गत किसी प्रकार का दुरूपयोग निवारक कारक न होना; इसके मुख्य रूप से जिम्मेदार वो लोग है जिन्होंने यह कानून तो बना दिया परन्तु इसके दुरूपयोग कि संभावनाओ पर विचार करने कि लेश मात्र कि भी जरुरत नहीं समझी; यह एक सर्वविदित तथ्य है कि आज़ादी के बाद सभी सरकारों ने दलितों के उत्थान के लिए बहुत सारी सुविधाए उपलब्ध करायी है; यह भी एक तथ्य है की जितना अधिक दलित उठा है उतना ही अधिक उसे सुविधाए प्रदान की गयी है वो भी बहुत अल्प काल में;
इसका परिणाम यह हुआ की उच्च पदों पर आसीन लोगो ने इस ब्रह्माश्त्र का प्रयोग अपने गलत कार्यो की सज़ा से बचने के लिए किया और निरंतर कर रहे है; वे अच्छी तरह से इसका दुरूपयोग करना जानते है. इनमे (दलितों में) इनमे से कुछ लोग इसका उपयोग पैसा बनाने और दुश्मनी निकालने के लिए भी कर रहे है. यदि आप का कोई पडोसी, सहकर्मी दलित है तो आप उसे कोई कार्य करने के लिए कुछ नहीं सकते; कोई चोर आपके घर में चोरी करता पकड़ा जाता है तो भी आप कुछ नहीं कर सकते क्योकि वो आपके खिलाफ इस एक्ट का उपयोग करके आपको ही जेल में डलवा देगा जहा न आपकी सुनवाई है न ही जमानत का कोई प्रावधान;
मेरे उत्तर प्रदेश राज्य में सामाजिक जागरण और राजनैतिक पार्टीओं के कारण ये लोग इतने चालाक हो गए है की इस एक्ट का गलत इस्तेमाल करने में कही नहीं चूकते है; जबसे दलित समाज के लोग राजनीति, सरकारी, गैर सरकारी संस्थाओं के उच्च पदों पर आसीन हो सुरु हुए है ; तबसे इन्होने इस एक्ट की कानूनी कमी का तेज़ी से फायदा उठाना शुरू कर दिया है.
इसलिए यह जरुरी है की SC/ST क्रूरता अधिनियम १९८९ में इसके गलत इस्तेमाल के निरोध हेतु कुछ उपाय किये जाये जिससे की अन्य (दलित समाज से इतर) जनमानस का विश्वास भी बना रहे तथा कानून में भी आस्था बनी रहे अन्यथा लोग इससे त्रस्त होकर कानून को अपने हाथ में ले लेंगे जिससे की कानून-व्यवस्था के सन्मुख समस्या उत्पन्न हो सकती है ;

Saturday, July 10, 2010

मैने खुद को ही तबाह होते हुऎ देखा ,
जर्रे जर्रे में गुनाह होते हुऎ देखा ।
रग रग में लहू बन के जो दौड़ता था,
मैनें उसको भी स्याह होते हुऎ देखा ।
उचाँईयों से ना मेरा जिक्र करो ,
खुद को गर्दिश में पनाह होते हुऎ देखा ।
जो समझता था मुझे मुझसे ज्यादा ,
मैने उसको भी खफ़ा होते हुऎ देखा ।
गैरों की क्या बात करूँ तुमसे ,
मैनें अपने साये को जुदा होते हुऎ देखा

Friday, July 9, 2010

KYA WO INSAAN THA

KABHI MEHERBAN THA TO KHABHI ANJAN THA
MERA WAHEM THA YA WO MERA GUMAAN THA
DE KAR ZAKHAM WO MARHAM RAKHTA THA
BAN RHA THA WO YA WAQAI ITNA NADAAN THA
MUJHSE BICHAD GYA THA WO EK RAAT
WO SHAKHS JO KAL TAK MERI PECHAN THA
KASH K WO BAN JATA MERA HAMARA HUMDAM
KITNA DIL KO IS BAAT KA ARMAAN THA
KHUDA KO CHAHTE ITNA TO KUCH MIL JATA SHAYAD
HUMNE CHAHA JIS KO WO EK INSAN THA

Thursday, July 8, 2010

क्यों नहीं लिखता मै

बेतहाशा चूमते हुए होंठो पर

अपना हाथ रख के,

उस दिन जब पूंछा था तुमने

कि

"अब क्यों नहीं लिखता मै कविता तुम पर"

कहना चाहता था

कि

"लिख ही तो रहा था अभी

जब तुमने अचानक रख दिया हाथ.......!!"