तुम अनाज उगाओगे
तुम्हे रोटी नहीं मिलेगी,
तुम ईंट पत्थर जोड़ोगे
तुम्हें सड़क पर सोना होगा,
तुम कपड़े बुनोगे
और तुम नंगे रहोगे,
क्योंकि अब लोकतंत्र
अपनी परिभाषा बदल चुका है
लोकतंत्र में अब लोक
एक कोरी अवधारणा मात्र है,
सत्ता तुम्हारे नहीं
पूंजी के हाथ में है
और पूंजी
नीराओं, राजाओं
कलमाडियों और टाटाओं के हाथ में है,
तुम्हारी ज़बान, तुम्हारी मेहनत
तुम्हारी स्वतंत्रता, तुम्हारा अधिकार
सिर्फ संवैधानिक कागजों में है
हकीकत में नहीं,
तभी तो
तुम्हारी चंद रुपये की चोरी
तुम्हें जेल पहुंचा देती है
मगर
उनकी अरबों की हेराफेरी
महज एक
राजनितिक खेल बनकर रह जाती है।
Saturday, March 19, 2011
Sunday, March 13, 2011
humko hindu hone ka abhimaan hai
सब धर्मो का स्वागत करने में यह देश उदार है
किन्तु राष्ट्र पे संकट आये तो सब इनकार है
शहंशाह अकबर के दीनइलाही से नफरत नहीं
किन्तु महराना प्रताप के राष्ट्र धर्म से प्यार है
हर स्थिति में अपनी संस्कृति अपना देश महान है
हम हिन्दू है, और हमको हिन्दू होने का अभिमान है...
तोड़ फोड़ करना चाहे कोई मेहमान इस देश रुपी मकान में
तो उसको पंहुचा देंगे हम सीधा दुसरे जहां में
सबका है सम्मान यहाँ, बस इतना रखिये ध्यान में
हिन्दू बनकर ही रहना होगा हमारे हिन्दुस्तान में
इस घर का नन्हा सा दीपक भी पूरा तूफ़ान है
हम हिन्दू है, और हमको हिन्दू होने का अभिमान है....
वह सच्चा हिन्दू है जिसको हिन्दू होने का भान है
हम हिन्दू है, और हमको हिन्दू होने का अभिमान है...
जय हिंद.... जय जय हिन्दुस्तान,,.,. जय हिंद की सेना....
किन्तु राष्ट्र पे संकट आये तो सब इनकार है
शहंशाह अकबर के दीनइलाही से नफरत नहीं
किन्तु महराना प्रताप के राष्ट्र धर्म से प्यार है
हर स्थिति में अपनी संस्कृति अपना देश महान है
हम हिन्दू है, और हमको हिन्दू होने का अभिमान है...
तोड़ फोड़ करना चाहे कोई मेहमान इस देश रुपी मकान में
तो उसको पंहुचा देंगे हम सीधा दुसरे जहां में
सबका है सम्मान यहाँ, बस इतना रखिये ध्यान में
हिन्दू बनकर ही रहना होगा हमारे हिन्दुस्तान में
इस घर का नन्हा सा दीपक भी पूरा तूफ़ान है
हम हिन्दू है, और हमको हिन्दू होने का अभिमान है....
वह सच्चा हिन्दू है जिसको हिन्दू होने का भान है
हम हिन्दू है, और हमको हिन्दू होने का अभिमान है...
जय हिंद.... जय जय हिन्दुस्तान,,.,. जय हिंद की सेना....
Saturday, March 12, 2011
Friday, March 11, 2011
सेक्युलर भारत
ये छद्म-सेक्युलर भारत है !
यहाँ गुजरात दंगों का ज़िक्र होता है, लेकिन गोधरा का नहीं l
कंधमाल की बात होती है, लेकिन स्वामी लक्ष्मणानंद जी की हत्या की नहीं l
कश्मीर में सेना पर पत्थर फेंकने वाले "मासूम" युवाओं की बात होती है, लेकिन कश्मीरी पण्डितों की नहीं। और न ही उन पत्थरों और दंगाइयों के हमले से घायल हुए सैनिक ... जिनकी संख्या 2800 से भी ज्यादा थी जो अस्पतालों में 4 महीने तक ADMIT रहे.. क्योंकि उनकी एडियाँ तोड़ दी गई थीं....
अफज़ल और कसाब जेल में शान से रहते हैं, साध्वी प्रज्ञा जैसे संत यातनाएँ सहते हैं,
नक्सली और आतंकी "भटके हुए नौजवान" कहलाते हैं, और बजरंग दल, शिवसेना के कार्यकर्ता आतंकवादी बताये जाते हैं,
अरुँधती और गिलानी राष्ट्रद्रोह करके भी मुक्त हैं,संघ के देशभक्त कार्यकर्ता आतंक के झूठे आरोपों से त्रस्त हैं।
प्राचीन शिव मन्दिर तेजो महालय को ताज महल इतिहास में पढ़ाया जाता है,
विजय स्तम्भ को क़ुतुब मीनार कहला दिया जाता है,
अकबर महान.... राना प्रताप, शिवाजी, गुरु गोबिंद सिंह जी को गाँधी के शब्दों में भटके हुए योद्धा कहलाते हैं
नेताजी, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु , आजाद आदि सब आतंकवादी ....
और अफजल, कसाब सोहराबुद्दीन .... सब शहीद कहलाते हैं
शायद हिंदू विरोध ही इस देश की शान है, क्या इसीलिये मेरा भारत महान है?
जय श्री राम
जय भारत जय हो
यहाँ गुजरात दंगों का ज़िक्र होता है, लेकिन गोधरा का नहीं l
कंधमाल की बात होती है, लेकिन स्वामी लक्ष्मणानंद जी की हत्या की नहीं l
कश्मीर में सेना पर पत्थर फेंकने वाले "मासूम" युवाओं की बात होती है, लेकिन कश्मीरी पण्डितों की नहीं। और न ही उन पत्थरों और दंगाइयों के हमले से घायल हुए सैनिक ... जिनकी संख्या 2800 से भी ज्यादा थी जो अस्पतालों में 4 महीने तक ADMIT रहे.. क्योंकि उनकी एडियाँ तोड़ दी गई थीं....
अफज़ल और कसाब जेल में शान से रहते हैं, साध्वी प्रज्ञा जैसे संत यातनाएँ सहते हैं,
नक्सली और आतंकी "भटके हुए नौजवान" कहलाते हैं, और बजरंग दल, शिवसेना के कार्यकर्ता आतंकवादी बताये जाते हैं,
अरुँधती और गिलानी राष्ट्रद्रोह करके भी मुक्त हैं,संघ के देशभक्त कार्यकर्ता आतंक के झूठे आरोपों से त्रस्त हैं।
प्राचीन शिव मन्दिर तेजो महालय को ताज महल इतिहास में पढ़ाया जाता है,
विजय स्तम्भ को क़ुतुब मीनार कहला दिया जाता है,
अकबर महान.... राना प्रताप, शिवाजी, गुरु गोबिंद सिंह जी को गाँधी के शब्दों में भटके हुए योद्धा कहलाते हैं
नेताजी, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु , आजाद आदि सब आतंकवादी ....
और अफजल, कसाब सोहराबुद्दीन .... सब शहीद कहलाते हैं
शायद हिंदू विरोध ही इस देश की शान है, क्या इसीलिये मेरा भारत महान है?
जय श्री राम
जय भारत जय हो
tanha hu main
मुझे अफ़सोस नहीं
इस बात का ,
की मै किसी का ना हुआ !
मुझे दर्द है की
मैंने हर वक़्त
हर एक का होने की कोशिश की !
मै छला गया अक्सर
शायद पता नहीं ,
या मुझे एहसास ना हुआ !
मुझे रंज है की
मेरे दिलो-दिमाग ने
मुझे कभी बचाने की कोशिश भी ना की !
मुझे तड़प तो है
की मै आज तनहा ,
किसी गुलाब का हमराज़ ना हुआ !
क्या करता मेरा जिस्म
हर गुलाब ने कांटे दिए ,
किसी ने मेरी ज़िन्दगी सजाने की कोशिश ना की !
इस बात का ,
की मै किसी का ना हुआ !
मुझे दर्द है की
मैंने हर वक़्त
हर एक का होने की कोशिश की !
मै छला गया अक्सर
शायद पता नहीं ,
या मुझे एहसास ना हुआ !
मुझे रंज है की
मेरे दिलो-दिमाग ने
मुझे कभी बचाने की कोशिश भी ना की !
मुझे तड़प तो है
की मै आज तनहा ,
किसी गुलाब का हमराज़ ना हुआ !
क्या करता मेरा जिस्म
हर गुलाब ने कांटे दिए ,
किसी ने मेरी ज़िन्दगी सजाने की कोशिश ना की !
purani yaad
दुःख की लहर ने छेड़ा होगा
याद में कंकड़ फेंका होगा
आज तो मेरा दिल कहता है
वो इस वक़्त अकेला होगा
मैं आज बहुत रोया हूँ
तू भी शायद रोया होगा
मेरे चूमे हुए हाथो से
औरो को ख़त लिखता होगा
मेरे दोस्त शाम का एक तारा
तुझसे आँखे मिलाता होगा
यादों की जलती हुई शबनम से,
फूलों सा मुखड़ा धोया होगा
हर्ष तेरा आशिक पुराना
तुझको याद तो आता होगा
याद में कंकड़ फेंका होगा
आज तो मेरा दिल कहता है
वो इस वक़्त अकेला होगा
मैं आज बहुत रोया हूँ
तू भी शायद रोया होगा
मेरे चूमे हुए हाथो से
औरो को ख़त लिखता होगा
मेरे दोस्त शाम का एक तारा
तुझसे आँखे मिलाता होगा
यादों की जलती हुई शबनम से,
फूलों सा मुखड़ा धोया होगा
हर्ष तेरा आशिक पुराना
तुझको याद तो आता होगा
Thursday, March 10, 2011
gandhi
नेहरू के विभिन्न स्त्रियों से सम्बन्धो की चर्चा तो हमेशा होती ही रही है किन्तु अभी गांधी जी के स्त्रियों के के सम्बन्ध पर मौन प्रश्न विद्यमान है। गांधी जी ने अपनी पुस्तक सत्य के प्रयोग में अपने बारे में जो कुछ लिखा है उसमें कितना सही है, यह गांधी से अच्छा कौन जान सकता है? गांधी जी के जीवन के सम्बन्ध में अभी तक इतना ही जाना जा सका है जितना कि नवजीवन प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। आज गांधी की वास्तविक स्थिति हम अनभिज्ञ है, बहुत से बातों में गांधी को समझ पाना कठिन है। गांधी की नज़रों में गीता माता है, पर वे गीता के हर श्लोक से बंधे नही थे, वह हिन्दू धर्म को तो मानते थे किन्तु मंदिर जाना अपने लिये गलत मानते थे, वे निहायत आस्तिक थे किन्तु भगवान सत्य से बड़ा या भिन्न हो सकता है उन्हे इसका सदेह था ठीक इसी प्रकार ब्रह्मचर्य उनका आदर्श रहा, लेकिन औरत के साथ सोना और उलंग होकर सोना उनके लिये स्वाभाविक बन गया था।
गांधी के सत्य के प्रयोगों में ब्रह्मचर्य भी प्रयोग जैसा ही था, विद्वानों का कथन है कि गांधी जी अपने इस प्रयोग को लेकर अपने कई सहयोगियों से चर्चा और पत्रचार द्वारा बहस भी की। एक पुस्तक में एक घटना का उल्लेख किया जाता है - पद्मजा नायडू (सरोजनी नाडयू की पुत्री) ने लिखा है कि गांधी जी उन्हे अकसर चिट्ठी लिखा करते थे ( पता नही गांधी जी और कितनी औरतो को चिट्ठी लिखा करते थे :-) ), एक हफ्ते में पद्मजा के पास गांधी जी की दो तीन चिट्ठियाँ आती है, पद्मजा की बहन लीला मणि कहती है कि बुड्डा (माफ करे, गांधी के लिये यही शब्द वहाँ लिखा था, एक बार मैने बुड्डे के लिये बुड्डा शब्द प्रयोग किया था तो कुछ लोग भड़क गये थे, बुड्डे को बुड्डा क्यो बोला) जरूर तुमसे प्यार करता होगा, नही तो ऐसी व्यस्ता में तुमको चिट्ठी लिखने का समय कैसे निकल लेता है ?
लीला मंणि की कही गई बातो को पद्मजा गांधी जी को लिख भेजती है, कि लीलामणि ऐसा कहती है। गांधी जी का उत्तर आता है। '' लीलामणि सही ही कहती है, मै तुमसे प्रेम करता हूँ। लीलामणि को प्रेम का अनुभव नही, जो प्रेम करता है उसे समय मिल ही जाता है।'' पद्मजा नायडू की बात से पता चलता है कि गांधी जी की औरतो के प्रति तीव्र आसक्ति थी, यौन सम्बन्धो के बारे में वे ज्यादा सचेत थे, अपनी आसक्ति के अनुभव के कारण उन्हे पाप समझने लगे। पाप की चेतना से ब्रह्मचर्य के प्रयो तक उनमें एक उर्ध्वमुखी विकास है । इस सारे प्रयोगो के दौरान वे औरत से युक्त रहे मुक्त नही। गांधी का पुरूषत्व अपरिमेय था, वे स्वयं औरत, हिजड़ा और माँ बनने को तैयार थे, यह उनकी तीवता का ही लक्षण था। इसी तीव्रता के कारण गांधी अपने यौन सम्बन्धो बहुतआयामी बनाने की सृजनशीलता गांधी में थी। वो मनु गांधी की माँ भी बने और उसके साथ सोये भी।
गांधी सत्य के प्रयोग के लिये जाने जाते है। उनके प्रयोग के परिणाम आये भी आये होगा और बुरे भी। हमेशा प्रयोगों के लिये कामजोरो का ही शोषण होता है- इसी क्रम में चूहा, मेढ़क आदि मारे जाते है। गांधी ने अपने ब्रह्मचर्य के प्रयोग जो अन्यों पर किये होगे वे कौन है और उन पर क्या बीती होगी, यह प्रश्न आज भी अनुत्तरित है। गांधी की दया सिर्फ स्वयं तक सीमित रही, वह भिखरियों से नफरत करके है, उनके प्रति उनकी तनिक भी सहनुभूति नही दिखती है ये बो गांधी जिसे भारत के तत्कालीन परिस्थित से अच्छा ज्ञान रहा होगा। गांधी के इस रूप से गांधी से क्रर इस दुनिया में कौन हो सकता है, जो पुरूष हो कर माँ बनना चाहता है।
इस लेख के सम्पूर्ण तथ्य राज कमल प्रकाशन से प्रकाशित किशन पटनायक की पुस्तक विकल्पहीन नही है दुनिया के पृष्ठ संख्या 101 में गांधी और स्त्री शीर्षक के लेख से लिये गये है।
गांधी के सत्य के प्रयोगों में ब्रह्मचर्य भी प्रयोग जैसा ही था, विद्वानों का कथन है कि गांधी जी अपने इस प्रयोग को लेकर अपने कई सहयोगियों से चर्चा और पत्रचार द्वारा बहस भी की। एक पुस्तक में एक घटना का उल्लेख किया जाता है - पद्मजा नायडू (सरोजनी नाडयू की पुत्री) ने लिखा है कि गांधी जी उन्हे अकसर चिट्ठी लिखा करते थे ( पता नही गांधी जी और कितनी औरतो को चिट्ठी लिखा करते थे :-) ), एक हफ्ते में पद्मजा के पास गांधी जी की दो तीन चिट्ठियाँ आती है, पद्मजा की बहन लीला मणि कहती है कि बुड्डा (माफ करे, गांधी के लिये यही शब्द वहाँ लिखा था, एक बार मैने बुड्डे के लिये बुड्डा शब्द प्रयोग किया था तो कुछ लोग भड़क गये थे, बुड्डे को बुड्डा क्यो बोला) जरूर तुमसे प्यार करता होगा, नही तो ऐसी व्यस्ता में तुमको चिट्ठी लिखने का समय कैसे निकल लेता है ?
लीला मंणि की कही गई बातो को पद्मजा गांधी जी को लिख भेजती है, कि लीलामणि ऐसा कहती है। गांधी जी का उत्तर आता है। '' लीलामणि सही ही कहती है, मै तुमसे प्रेम करता हूँ। लीलामणि को प्रेम का अनुभव नही, जो प्रेम करता है उसे समय मिल ही जाता है।'' पद्मजा नायडू की बात से पता चलता है कि गांधी जी की औरतो के प्रति तीव्र आसक्ति थी, यौन सम्बन्धो के बारे में वे ज्यादा सचेत थे, अपनी आसक्ति के अनुभव के कारण उन्हे पाप समझने लगे। पाप की चेतना से ब्रह्मचर्य के प्रयो तक उनमें एक उर्ध्वमुखी विकास है । इस सारे प्रयोगो के दौरान वे औरत से युक्त रहे मुक्त नही। गांधी का पुरूषत्व अपरिमेय था, वे स्वयं औरत, हिजड़ा और माँ बनने को तैयार थे, यह उनकी तीवता का ही लक्षण था। इसी तीव्रता के कारण गांधी अपने यौन सम्बन्धो बहुतआयामी बनाने की सृजनशीलता गांधी में थी। वो मनु गांधी की माँ भी बने और उसके साथ सोये भी।
गांधी सत्य के प्रयोग के लिये जाने जाते है। उनके प्रयोग के परिणाम आये भी आये होगा और बुरे भी। हमेशा प्रयोगों के लिये कामजोरो का ही शोषण होता है- इसी क्रम में चूहा, मेढ़क आदि मारे जाते है। गांधी ने अपने ब्रह्मचर्य के प्रयोग जो अन्यों पर किये होगे वे कौन है और उन पर क्या बीती होगी, यह प्रश्न आज भी अनुत्तरित है। गांधी की दया सिर्फ स्वयं तक सीमित रही, वह भिखरियों से नफरत करके है, उनके प्रति उनकी तनिक भी सहनुभूति नही दिखती है ये बो गांधी जिसे भारत के तत्कालीन परिस्थित से अच्छा ज्ञान रहा होगा। गांधी के इस रूप से गांधी से क्रर इस दुनिया में कौन हो सकता है, जो पुरूष हो कर माँ बनना चाहता है।
इस लेख के सम्पूर्ण तथ्य राज कमल प्रकाशन से प्रकाशित किशन पटनायक की पुस्तक विकल्पहीन नही है दुनिया के पृष्ठ संख्या 101 में गांधी और स्त्री शीर्षक के लेख से लिये गये है।
bharastachar
अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो जान थोड़ी है
ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है
लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द में
यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है
......
मैं जानता हूँ के दुश्मन भी कम नहीं लेकिन
हमारी तरहा हथेली पे जान थोड़ी है
जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं होंगे
किराएदार हैं ज़ाती मकान थोड़ी है..
ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है
लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द में
यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है
......
मैं जानता हूँ के दुश्मन भी कम नहीं लेकिन
हमारी तरहा हथेली पे जान थोड़ी है
जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं होंगे
किराएदार हैं ज़ाती मकान थोड़ी है..
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