Friday, March 11, 2011

tanha hu main

मुझे अफ़सोस नहीं
इस बात का ,
की मै किसी का ना हुआ !
मुझे दर्द है की
मैंने हर वक़्त
हर एक का होने की कोशिश की !
मै छला गया अक्सर
शायद पता नहीं ,
या मुझे एहसास ना हुआ !
मुझे रंज है की
मेरे दिलो-दिमाग ने
मुझे कभी बचाने की कोशिश भी ना की !
मुझे तड़प तो है
की मै आज तनहा ,
किसी गुलाब का हमराज़ ना हुआ !
क्या करता मेरा जिस्म
हर गुलाब ने कांटे दिए ,
किसी ने मेरी ज़िन्दगी सजाने की कोशिश ना की !

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