ये छद्म-सेक्युलर भारत है !
यहाँ गुजरात दंगों का ज़िक्र होता है, लेकिन गोधरा का नहीं l
कंधमाल की बात होती है, लेकिन स्वामी लक्ष्मणानंद जी की हत्या की नहीं l
कश्मीर में सेना पर पत्थर फेंकने वाले "मासूम" युवाओं की बात होती है, लेकिन कश्मीरी पण्डितों की नहीं। और न ही उन पत्थरों और दंगाइयों के हमले से घायल हुए सैनिक ... जिनकी संख्या 2800 से भी ज्यादा थी जो अस्पतालों में 4 महीने तक ADMIT रहे.. क्योंकि उनकी एडियाँ तोड़ दी गई थीं....
अफज़ल और कसाब जेल में शान से रहते हैं, साध्वी प्रज्ञा जैसे संत यातनाएँ सहते हैं,
नक्सली और आतंकी "भटके हुए नौजवान" कहलाते हैं, और बजरंग दल, शिवसेना के कार्यकर्ता आतंकवादी बताये जाते हैं,
अरुँधती और गिलानी राष्ट्रद्रोह करके भी मुक्त हैं,संघ के देशभक्त कार्यकर्ता आतंक के झूठे आरोपों से त्रस्त हैं।
प्राचीन शिव मन्दिर तेजो महालय को ताज महल इतिहास में पढ़ाया जाता है,
विजय स्तम्भ को क़ुतुब मीनार कहला दिया जाता है,
अकबर महान.... राना प्रताप, शिवाजी, गुरु गोबिंद सिंह जी को गाँधी के शब्दों में भटके हुए योद्धा कहलाते हैं
नेताजी, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु , आजाद आदि सब आतंकवादी ....
और अफजल, कसाब सोहराबुद्दीन .... सब शहीद कहलाते हैं
शायद हिंदू विरोध ही इस देश की शान है, क्या इसीलिये मेरा भारत महान है?
जय श्री राम
जय भारत जय हो
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