एक सुबह जब आँख खुली तो मेरे उड़ गये होश ,
मेरे बीवी खड़ी सामने आँखों में भर के जोश !
बोली मिस्टर कैसे हो और कैसी कटी है आपकी रात ,
ना जाने क्यों कर रही थे मिश्री से मीठी बात !
मैंने पूछा ओ डियर आज मैं तुमको क्यो भाया ,
पलकें झुकए बड़ी शर्म से बोली करवाचौथ है आया !
ये सुन कर मेरे शरीर मैं दौड़ उठा करेंट ,
समझ गया था मेरे नाम का निकल चुका वारेंट!
इस दिन का इंतजार हर शौहर को है रहता ,
बड़ी अदब से बात मनती मैं जैसा-जैसा कहता !
पूरा साल बीत गया था सुन -सुन के ताने ,
आज कहे हर बात पे हाँ , ये मेरी ही माने !
मुझे कभी परमेश्वर कहती कभी कहे देव ,
खुद तो व्रत रखती पर मुझको देती सेब !
शाम होते होते फिर वो घड़ी है आती ,
गिफ्ट गिफ्ट का राग आलापे बाज़ार ले जाती !
अहसानों के बोझ तले दब मुझ को आए रोना ,
नहीं चाहते हुए भी लेना पड़े है महँगा सोना !
देर रत जब चाँद ना निकले ये चाँद -चाँद चिल्लाए ,
कभी भेजे नुक्कड़ पे मुझको कभी छत पे दौड़ाए !
मैं भी जब दौड़- दौड़ के हो जाता परेशान ,
हाथ जोड़ कर चाँद से बोलूं अब बात इसकी मान !
आज तुम्हारा दिन है इसलिए खा रहे भाव ,
कल से कौन पूछेगा तुम को जब आओ जब जाव !
इतनी से बात क्यों मैडम के समझ ना आती ,
जो साल भर प्यार जताती तो बात बन जाती !
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