Sunday, June 13, 2010

काजू भुनी प्लेट मेँ व्हिस्की गिलास मेँ ।
उतरा है राम राज्य विधायक निवास मेँ ।।
पक्के समाजवादी हैँ तस्कर होँ या डकैत ।
इतना असर है खादी के उजले लिबास मेँ ।।
पैसे से आप चाहेँ तो सरकार गिरा देँ ।
संसद बदल गयी है यहाँ की नक्खास मेँ ।।
आजादी का वो जश्न मनाएँ तो किस तरह ।
जो आ गये फुटपाथ पर घर की तलाश मेँ ।।
जनता के पास एक ही चारा है बगावत ।
ये बात कह रहा हूँ मैँ होशो हवास मेँ ।



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