Sunday, April 15, 2012

jalianwala bagh

कैसे मीठे गीत सुनाऊँ,कैसे सुंदर छंद बनाऊँ,
बेबस लोगों की मौतों का,दर्द भरा एक राग है.
ये जलियांवाला बाग है.

अमृतसर की खुशहाली को कोलाहल ने घेरा है.
भारत माता की भूमि पर अंग्रेजों का डेरा है.
सत्य अहिंसा की धरती पे ये काली परछाई है.
मौन निहत्थे इंसानों पर क्यूं गोली चलवाई है.
शर्मसार सारा संसार ये मानवता पर दाग है.

………… ये जलियांवाला बाग है.

मौत के सौदागर, ये देखो! तंग गली से आये है.
हाथ में बंदूकें हैं जिनके, लगते मौत के साये है.
बारूद की गर्जन से ऊपर आसमान थर्राया है.
नरसंहार की निर्ममता से सबका दिल भर आया है.
कहीं लाल को लील गया, तो कहीं निढाल सुहाग है.

………… ये जलियांवाला बाग है.

अफरा तफरी उस ज़ालिम ने चारों तरफ मचाई है.
धर्म वेद सब शून्य हो गए, काँप रही सच्चाई है.
रिश्तों के गहरे बंधन भी एक वार में टूट गए .
अपनी जान बचाने को अंधे कुँए में कूद गए.
बाहर जनरल डायर है, अन्दर ज़हरीले नाग है.

………… ये जलियांवाला बाग है.

भरी भीड़ पर दुश्मन ने इतनी गोली चलवाई हैं.
नन्हे-मुन्नों के हिस्से भी दस दस गोली आई हैं.
नहीं सुन रही चीत्कारें भी, चारो तरफ अँधेरा है.
ये कैसी सुबह है, जिसको अंधकार ने घेरा है.
उजड़ गयी है कोख किसी की,बुझा कही पे चिराग है.

………… ये जलियांवाला बाग है.

भारत माँ लाशों पर बैठी खून के आंसूं रोती है.
देश पे मर मिटने वालों की कैसी हालत होती है.
दुश्मन की करतूतों पर क्यूं बहा रही तू नीर है?
तेरी गोद में माँ जननी अभी भगत सिंह से वीर हैं.
जनरल डायर तू है कायर, दिल में दहकी आग है.

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