संसद के दरवाजो से चीत्कार सुनाई देती है
कुछ खोटे पापी सिक्को की अब हार सुनाई देती है,
मेरा जन-गन वाला भारत भूखा प्यासा बैठा है,
सविधान का रखवाला कुर्सी पर बैठा एठा है
कोई तिरंगा चीर रहा है सरे आम बाजारों में,
कोई मसीहा पूज रहा है एटम बम हथियारों में,
कोई कोई मेरे देश का सौदा करने लगता है,
कोई विदेशी मुद्रा अपने मठ में भरने लगता है,
कोई भारतवासी अपने घर में भूखा सोता है,
रोटी एक कमा के लाता बच्चा खाके सोता है
कोई कुछ कुछ मिला रहा है नमक दाल और शक्कर में
कोई सोनावाड़े जला है माफ़िआओ के चक्कर में
कोई विधवा के फ्लैटों को अपना कहना लगता है,
कोई मवाली हत्यारा संसद में रहने लगता है
कोई खबरे भेज रहा है गैर पडोसी देशो में,
कोई जीवन दूढ़ रहा है बचे हुए अवशेषों में
कोई उची कुर्सी वाला हाथ जोड़ रह जाता है
और करोडो का घोटाला ए-राजा कर जाता है
काला धन मेरे भारत का पड़ा विदेशी मुल्को में
जासूस खबरे बेच रहा है नाम मात्र के शुल्को में
कही जले है लाखो गाँधी सच्चाई के कारण जी
जन गन मन का नहीं करपाते नेता कुछ उच्चारण जी
देश प्रेम का ढोंग घिनोना ढोंगी मोह को देखो जी
बापू जी की पुन्य तिथि पर फैशन शो को देखो जी
मैंने तो हरदम कोसा है भ्रस्टाचारी ताकत को
जी मै गद्दारी कहता महगाई और मिलावट को
कोई नेता नाचे नंगा नेहरु वाली धरती पे
कोई ताली पीट रहा है भारत देश की अर्थी पे
कोई ठुमके लगा रहा है फैशन वाले रैम्पो पर
कोई किडनी चुरा रहा है मुफ्त चिक्तिसा कैम्पों पर
सोने की चिड़िया का हिंद आवाज लगता सुन लो जी
दीन हीन अध् मारा पड़ा फ़रियाद सुनाता सुन लो जी
मुझको तो केवल लूटा है सत्ताधारी ताकत ने
और सुंहागा लगा दिया है हिंसा लूट मिलावट ने
शब्दों में जो बध न पाये ऐसी मेरी हालत है
डूब मरो ए गद्दारों ये गाँधी वाला भारत है
ऊँगली उठाना घाव कुरेदना यही लक्ष्य नहीं मेरा जी
भारत देश लुटेरो का ही नहीं सिर्फ एक डेरा जी
यहाँ अब भी बचे हुए है गाँधी के विचार जी
इधर उधर बिखर रहे गाँधी के विचार जी
विश्वास नहीं टूटा अब तिलक घोख्ले बुद्धो पर
देश भक्त अब सोच रहे है नवनीति के मुद्दों पर
हम भी आये तुम भी आओ करने सोच विचार जी
भ्रस्टाचारी पापिओ का करदे का तमाम जी
रोके मिलावट खोरी चीजो की चोर बाजारी को
उत्पादन खूब बढ़ा के अपना भूले हम लाचारी को
संसार शिरोमणि था ये देश फिर से बने महान जी
मेरा भारत प्यारा भारत जाए न इसकी शान जी
मेरा भारत प्यारा भारत जाए न इसकी शान जी
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