Wednesday, July 14, 2010

१९८९ में sc/st एक्ट का गठन दलित वर्ग के लोगो को सुरक्छा देने के लिए किया गया था; लेकिन आज कल दलित तबके के बहुतायत लोग इस क्रूरता अधिनियम का दुरूपयोग कर रहे ; उनके द्वारा इस दुरूपयोग का मुख्य कारण है इसके (sc/st एक्ट) अंतर्गत किसी प्रकार का दुरूपयोग निवारक कारक न होना; इसके मुख्य रूप से जिम्मेदार वो लोग है जिन्होंने यह कानून तो बना दिया परन्तु इसके दुरूपयोग कि संभावनाओ पर विचार करने कि लेश मात्र कि भी जरुरत नहीं समझी; यह एक सर्वविदित तथ्य है कि आज़ादी के बाद सभी सरकारों ने दलितों के उत्थान के लिए बहुत सारी सुविधाए उपलब्ध करायी है; यह भी एक तथ्य है की जितना अधिक दलित उठा है उतना ही अधिक उसे सुविधाए प्रदान की गयी है वो भी बहुत अल्प काल में;
इसका परिणाम यह हुआ की उच्च पदों पर आसीन लोगो ने इस ब्रह्माश्त्र का प्रयोग अपने गलत कार्यो की सज़ा से बचने के लिए किया और निरंतर कर रहे है; वे अच्छी तरह से इसका दुरूपयोग करना जानते है. इनमे (दलितों में) इनमे से कुछ लोग इसका उपयोग पैसा बनाने और दुश्मनी निकालने के लिए भी कर रहे है. यदि आप का कोई पडोसी, सहकर्मी दलित है तो आप उसे कोई कार्य करने के लिए कुछ नहीं सकते; कोई चोर आपके घर में चोरी करता पकड़ा जाता है तो भी आप कुछ नहीं कर सकते क्योकि वो आपके खिलाफ इस एक्ट का उपयोग करके आपको ही जेल में डलवा देगा जहा न आपकी सुनवाई है न ही जमानत का कोई प्रावधान;
मेरे उत्तर प्रदेश राज्य में सामाजिक जागरण और राजनैतिक पार्टीओं के कारण ये लोग इतने चालाक हो गए है की इस एक्ट का गलत इस्तेमाल करने में कही नहीं चूकते है; जबसे दलित समाज के लोग राजनीति, सरकारी, गैर सरकारी संस्थाओं के उच्च पदों पर आसीन हो सुरु हुए है ; तबसे इन्होने इस एक्ट की कानूनी कमी का तेज़ी से फायदा उठाना शुरू कर दिया है.
इसलिए यह जरुरी है की SC/ST क्रूरता अधिनियम १९८९ में इसके गलत इस्तेमाल के निरोध हेतु कुछ उपाय किये जाये जिससे की अन्य (दलित समाज से इतर) जनमानस का विश्वास भी बना रहे तथा कानून में भी आस्था बनी रहे अन्यथा लोग इससे त्रस्त होकर कानून को अपने हाथ में ले लेंगे जिससे की कानून-व्यवस्था के सन्मुख समस्या उत्पन्न हो सकती है ;

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