वफ़ा कि आखरी हद से गुजर लिया जाए
सितमगरों के मोहल्ले में घर ले लिया जाए
जिधर निगाह उठे आप ही के जलवे हो
जिए तो ऐसे जिए वरना मर लिया जाए
सवाल ठीक नहीं है ये आदमी के लिए
कि दिल किसी के लिए जुबान किसी के लिए
न ऐतबार वफ़ा का करके वो निगाहों को शायद
कभी किसी के लिए है कभी किसी के लिए
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