सुन्दर थी सुाील थी, हर अर्थ में न्यारी थी।
गरीब की सयानी बेटी, फिर भी कुॅआरी थी॥
मिला भी था एक वर,मॉग उसकी भारी थी।
मागों की यह बेडी, गरीब ही लाचारी थी॥
टी0वी0 फ्रिज स्कूटर देकर, मांग उसकी भरी थी।
खुद हो गये बेघर पर, डोली घर से उठी थी॥
दो माह बाद मिली बेटी बाबुल से कुछ नहीं बोली थी ।
उसकी हालत बोलती, थी दहेज में कुछ कमी थी ॥
जान के अंजान बना, बाबुल की कमजोरी थी।
मिली दोबारा बेटी जब, चिर निन्द्रा लेती लोरी थी ॥
हॉ मॉग उसकी भरी थी, सिन्दूर से व सजी थी।
चारों तरफ भाोर था, सुहागिन ही मरी थी॥
गरीब की सयानी बेटी, फिर भी कुॅआरी थी॥
मिला भी था एक वर,मॉग उसकी भारी थी।
मागों की यह बेडी, गरीब ही लाचारी थी॥
टी0वी0 फ्रिज स्कूटर देकर, मांग उसकी भरी थी।
खुद हो गये बेघर पर, डोली घर से उठी थी॥
दो माह बाद मिली बेटी बाबुल से कुछ नहीं बोली थी ।
उसकी हालत बोलती, थी दहेज में कुछ कमी थी ॥
जान के अंजान बना, बाबुल की कमजोरी थी।
मिली दोबारा बेटी जब, चिर निन्द्रा लेती लोरी थी ॥
हॉ मॉग उसकी भरी थी, सिन्दूर से व सजी थी।
चारों तरफ भाोर था, सुहागिन ही मरी थी॥
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